गायत्री मंत्र वेदों का हृदय है। इसे वेद-माता मंत्रों की जननी और ब्रह्म का सार कहा जाता है। ऋग्वेद (मंडल 3, सूक्त 62, मंत्र 10) में यह प्रकट हुआ, जिसे सर्वप्रथम महर्षि विश्वामित्र ने दिव्य दृष्टि में अनुभव किया। इस मंत्र का देवता सविता है – जो केवल भौतिक सूर्य ही नहीं बल्कि परम चेतना और जीवन ऊर्जा का प्रतीक है।
यह मंत्र साधक की बुद्धि को शुद्ध कर उसे परमात्मा के मार्ग की ओर प्रेरित करता है।

गायत्री छंद की संरचना
- गायत्री छंद = 24 अक्षर
- इसे 3 पाद (पंक्तियाँ) में विभाजित किया गया है।
- प्रत्येक पंक्ति में 8 अक्षर होते हैं।
मंत्र:
ॐ भूर्भुवः स्वः
तत्सवितुर्वरेण्यं
भर्गो देवस्य धीमहि
धियो यो नः प्रचोदयात् ॥
ॐ भूर्भुवः स्वः’ महाव्याहृति है (भूमिका), जबकि 24 अक्षर शुद्ध छंद का भाग हैं।
- पहला पाद
तत्-स-वि-तु-र्व-रे-ण्यम् = 8 अक्षर
- दूसरा पाद
भ-र्गो-दे-व्य-स्य-धी-महि = 8 अक्षर
- तीसरा पाद
धि-यो-यो-नः-प्र-चो-दा-यात् = 8 अक्षर
- सप्त व्याहृतियाँ (भूः से सत्यम् तक ब्रह्मांड के 7 स्तर/लोक):ॐ भूः ॐ भुवः ॐ स्वः ॐ महः ॐ जनः ॐ तपः ॐ सत्यम्
- भूः → पृथ्वी (शरीर, भौतिक जीवन)
- भुवः → प्राण/मन (ऊर्जा, सांस)
- स्वः → आत्मिक स्तर (स्वर्गीय चेतना)
- महः → उच्च बुद्धि
- जनः → सृजन का स्तर
- तपः → तप, ऊर्जा, साधना
- सत्यम् → परम सत्य, ब्रह्म
गायत्री छंद का महत्व
- संतुलन और लयबद्धता – 8-8 अक्षर के कारण इसका उच्चारण बहुत मधुर और लयबद्ध है।
- श्वास से तालमेल – एक श्वास में लगभग 8 अक्षरों का उच्चारण सहज होता है → इससे प्राणायाम जैसा प्रभाव मिलता है।
- 24 अक्षर = 24 नाड़ियों पर कंपन – शरीर की 24 मुख्य नाड़ियों पर इसका प्रभाव पड़ता है।
- बुद्धि शुद्धि – इस छंद का vibration मस्तिष्क के दोनों हिस्सों (left-right hemisphere) को संतुलित करता है।
गायत्री मंत्र का शाब्दिक अर्थ
- ॐ – ब्रह्म, परमात्मा, सृष्टि का मूल।
- भूः – पृथ्वी, स्थूल शरीर।
- भुवः – अंतरिक्ष, प्राण।
- स्वः – स्वर्ग, आत्मा।
- तत् – वह परम सत्य।
- सवितुः – सूर्य रूपी परम चेतना।
- वरेण्यं – पूजनीय।
- भर्गः – दिव्य तेज।
- देवस्य – उस देव का।
- धीमहि – हम ध्यान करते हैं।
- धियो यो नः प्रचोदयात् – वह हमारी बुद्धि को प्रेरित करे
संक्षेप में अर्थ: “हम उस परम दिव्य प्रकाश का ध्यान करते हैं, जो हमारी बुद्धि को सच्चे मार्ग पर प्रेरित करे।”
मंत्र का वैज्ञानिक दृष्टि
गायत्री मंत्र में कुल 24 अक्षर हैं। प्रत्येक अक्षर मानव शरीर की एक नस, एक शक्ति केंद्र और एक ऊर्जा बिंदु को सक्रिय करता है। इसके उच्चारण से मस्तिष्क की सुप्त क्षमताएँ जाग्रत होती हैं।
- 24 अक्षर = 24 नाड़ियाँ – प्रत्येक अक्षर शरीर के ऊर्जा केंद्र को सक्रिय करता है।
- श्वास संतुलन: उच्चारण से प्राण प्रवाह स्थिर होता है।
- मस्तिष्क पर प्रभाव: जप से Alpha waves उत्पन्न होती हैं, जो मन को शांत करती हैं।
- चक्र जागरण:
- पहले 8 अक्षर → मूलाधार से अनाहत तक।
- अगले 8 अक्षर → विशुद्धि से आज्ञा तक।
- अंतिम 8 अक्षर → सहस्रार तक।

| मंत्र |
चक्र |
शरीर का स्थान |
ग्रंथि (Gland) |
हार्मोन |
संबंधित ग्रह |
गायत्री मंत्र का प्रभाव |
| भूः |
मूलाधार |
रीढ़ की हड्डी का निचला भाग (Coccyx) |
Adrenal |
Adrenaline, Cortisol |
शनि + मंगल |
सुरक्षा, साहस |
| भुवः |
स्वाधिष्ठान |
जननांग क्षेत्र (Pelvic region) |
Gonads (Ovaries/Testes) |
Estrogen, Progesterone, Testosterone |
शुक्र |
रचनात्मकता, संतुलन |
| स्वः |
मणिपुर |
नाभि क्षेत्र (Abdomen) |
Pancreas |
Insulin, Glucagon |
सूर्य |
आत्मविश्वास, ऊर्जा |
| तत्सवितुः |
अनाहत |
हृदय क्षेत्र (Chest) |
Thymus |
Thymosin |
चन्द्र |
प्रेम, करुणा, इम्यूनिटी |
| वरेण्यं भर्गः |
विशुद्धि |
गला (Throat/Neck) |
Thyroid/Parathyroid |
Thyroxine, Calcitonin |
बुध |
वाणी, संचार शक्ति |
| देवस्य धीमहि |
आज्ञा |
भृकुटि (Forehead between eyebrows) |
Pituitary |
Growth hormone, Oxytocin |
गुरु |
अंतर्ज्ञान, विवेक |
| धियो यो नः प्रचोदयात् |
सहस्रार |
सिर का शीर्ष (Crown of head) |
Pineal |
Melatonin, Serotonin |
केतु |
आत्मज्ञान, समाधि |
निष्कर्ष: गायत्री मंत्र का जप केवल आध्यात्मिक साधना ही नहीं, बल्कि शरीर की सम्पूर्ण ऊर्जा प्रणाली को संतुलित करने का भी उपाय है।
गायत्री मंत्र और विभिन्न देवी–देवताओं का संबंध
गायत्री मंत्र को वेदों में सर्वदेवात्मक मंत्र कहा गया है। यह सभी देवी-देवताओं का सार है।
- ब्रह्मा – सृष्टि की चेतना।
- विष्णु – पालन और संतुलन।
- महेश (शिव) – संहार और पुनर्निर्माण।
- सरस्वती – ज्ञान और वाणी।
- लक्ष्मी – समृद्धि और ऐश्वर्य।
- दुर्गा – शक्ति और रक्षा।
- सूर्य – जीवन ऊर्जा और प्रकाश।
गायत्री छंद इतना संतुलित और पूर्ण है कि इसमें किसी भी देवी-देवता का बीज मंत्र और विशेषण जोड़कर उसका गायत्री स्वरूप बनाया जा सकता है। इसी कारण प्रत्येक देवी-देवता के अनेक गायत्री मंत्र कुछ इस प्रकार प्रचलित हैं:-
गणेश जी
| क्रम |
गणेश जी का स्वरूप |
ग्रह |
गायत्री मंत्र |
उद्देश्य |
| 1 |
एकदंत |
केतु |
ॐ एकदंताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात् ॥ |
विघ्न नाश |
| 2 |
गजानन |
गुरु |
ॐ गजाननाय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात् ॥ |
स्थिरता और सफलता |
| 3 |
लम्बोदर |
शुक्र |
ॐ लम्बोदराय विद्महे महोदराय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात् ॥ |
संपत्ति-समृद्धि और सुख |
| 4 |
सिद्धिविनायक |
बुध |
ॐ सिद्धिविनायकाय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो गणेशः प्रचोदयात् ॥ |
सफलता, सिद्धि, कार्य-सिद्धि और रुकावटों का नाश |
| 5 |
महोदर |
गुरु + बुध |
ॐ महोदराय विद्महे गजमुखाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात् ॥ |
बुद्धि विस्तार, उदारता, और संयम |
| 6 |
विनायक |
सूर्य |
ॐ विनायकाय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो गणेशः प्रचोदयात् ॥ |
विघ्नहर्ता शक्ति, नेतृत्व शक्ति, शासन क्षमता, और कार्य पूर्णता |
| 7 |
धूम्रकेतु |
राहु |
ॐ धूम्रकेतवे विद्महे गजमुखाय धीमहि तन्नो गणेशः प्रचोदयात् ॥ |
नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति, आत्मबल और आत्मरक्षा |
| 8 |
बाल गणपति |
चन्द्र |
ॐ बालगणपतये विद्महे सिद्धिविनायकाय धीमहि तन्नो विघ्नेशः प्रचोदयात् ॥ |
आनंद, बालसुलभ आनंद, सरलता, और जीवन में प्रसन्नता |
| 9 |
हरिद्र गणपति |
शुक्र + गुरु |
ॐ हरिद्रगणपतये विद्महे सुवर्णवर्णाय धीमहि तन्नो गणेशः प्रचोदयात् ॥ |
धन, वैभव, और भौतिक समृद्धि |
| 10 |
ऊर्ध्व गणपति |
मंगल |
ॐ ऊर्ध्वगणपतये विद्महे गजमुखाय धीमहि तन्नो गणेशः प्रचोदयात् ॥ |
उन्नति, प्रतिष्ठा, सामाजिक सफलता |
| 11 |
हेरम्ब गणपति |
शनि |
ॐ हेरम्बाय विद्महे महागजमुखाय धीमहि तन्नो गणेशः प्रचोदयात् ॥ |
सुरक्षा, मातृत्व की करुणा, और आत्मविश्वास |
| 12 |
एकाक्षर गणपति |
केतु + बुध |
ॐ गं गणपतये विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो गणेशः प्रचोदयात् ॥ |
ध्यान, एकाग्रता, आध्यात्मिक शक्ति |
सूर्य देव
| क्रम |
सूर्य देव का स्वरूप |
ग्रह |
गायत्री मंत्र |
उद्देश्य |
| 1 |
सूर्य |
सूर्य दोष शांति |
ॐ सूर्याय विद्महे भास्कराय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात् ॥ |
आत्मा, स्वास्थ्य, राजयोग |
| 2 |
आदित्य |
चन्द्र |
ॐ आदित्याय विद्महे सहस्रकराय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात् ॥ |
स्वास्थ्य, जीवन ऊर्जा, नेत्र-ज्योति |
| 3 |
भास्कर |
मंगल |
ॐ भास्कराय विद्महे महातेजाय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात् ॥ |
तेज, आत्मबल, सफलता |
| 4 |
प्रभाकर |
बुध |
ॐ प्रभाकराय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात् ॥ |
ज्ञान, विवेक, आध्यात्मिक प्रकाश |
| 5 |
दिवाकर |
गुरु |
ॐ दिवाकराय विद्महे भास्कराय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात् ॥ |
सकारात्मकता, हृदय शक्ति |
| 6 |
भानु |
केतु |
ॐ भानवे विद्महे सहस्रकिरणाय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात् ॥ |
ध्यान, आत्मज्योति, मानसिक स्पष्टता |
| 7 |
सप्ताश्वरथ |
शनि |
ॐ सप्ताश्वरथाय विद्महे मार्तण्डाय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात् ॥ |
संकल्प शक्ति, नेतृत्व, कर्म सिद्धि |
12 आदित्य देवता
| क्रम |
आदित्य देवता का स्वरूप |
ग्रह |
गायत्री मंत्र |
उद्देश्य |
| 1 |
मित्र |
शुक्र |
ॐ मित्राय विद्महे सूर्याय धीमहि तन्नो मित्रः प्रचोदयात् ॥ |
मित्रता, प्रेम, सामंजस्य |
| 2 |
वरुण |
चन्द्र |
ॐ वरुणाय विद्महे जलदेवाय धीमहि तन्नो वरुणः प्रचोदयात् ॥ |
कर्म शुद्धि, पाप नाश, मानसिक संतुलन |
| 3 |
अर्यमन् |
शुक्र + गुरु |
ॐ अर्यम्णे विद्महे धर्मदेवाय धीमहि तन्नो अर्यमा प्रचोदयात्॥ |
विवाह, सामाजिक मर्यादा, धर्म |
| 4 |
भग |
गुरु |
ॐ भगाय विद्महे सौभाग्यदेवाय धीमहि तन्नो भगः प्रचोदयात् ॥ |
भाग्य वृद्धि, धन, ऐश्वर्य |
| 5 |
अंश |
सूर्य |
ॐ अंशवे विद्महे दीप्तिदेवाय धीमहि तन्नो अंशः प्रचोदयात् ॥ |
आत्मतेज, व्यक्तित्व विकास |
| 6 |
धाता |
शनि |
ॐ धात्रे विद्महे विधात्रे धीमहि तन्नो धाता प्रचोदयात् ॥ |
भाग्य निर्माण, स्थिरता |
| 7 |
त्वष्टा |
बुध |
ॐ त्वष्ट्रे विद्महे विश्वकर्मणे धीमहि तन्नो त्वष्टा प्रचोदयात् ॥ |
सृजन, कला, तकनीकी कार्य |
| 8 |
पूषा |
केतु |
ॐ पूष्णे विद्महे पथिदेवाय धीमहि तन्नो पूषा प्रचोदयात् ॥ |
यात्रा सुरक्षा, पोषण, परिवार |
| 9 |
विवस्वान् |
मंगल |
ॐ विवस्वते विद्महे प्रभाकराय धीमहि तन्नो विवस्वान् प्रचोदयात् ॥ |
तेज, स्वास्थ्य, आत्मबल |
| 10 |
विष्णु |
सर्वग्रह संतुलन |
ॐ विष्णवे विद्महे त्रिविक्रमाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् ॥ |
संरक्षण, स्थिर सफलता |
| 11 |
इन्द्र |
राहु |
ॐ इन्द्राय विद्महे वज्रहस्ताय धीमहि तन्नो इन्द्रः प्रचोदयात् ॥ |
नेतृत्व, साहस, विजय |
| 12 |
सूर्य |
सूर्य (आत्मबल शुद्धि) |
ॐ सूर्याय विद्महे भास्कराय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात् ॥ |
आत्मा, स्वास्थ्य, राजयोग |
विष्णु
| क्रम |
विष्णु स्वरूप |
ग्रह |
गायत्री मंत्र |
उद्देश्य |
| 1 |
नारायण विष्णु |
सर्वग्रह संतुलन |
ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् ॥ |
जीवन में संतुलन, करुणा और धर्म पालन |
| 2 |
श्री विष्णु (पालनकर्ता) |
गुरु |
ॐ श्रीविष्णवे विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् ॥ |
पालन, धर्म रक्षण और करुणा की वृद्धि |
| 3 |
परम विष्णु (परब्रह्म स्वरूप) |
केतु |
ॐ परमात्मने विद्महे परमेश्वराय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् ॥ |
आत्मज्ञान, मोक्ष, ब्रह्म-साक्षात्कार |
| 4 |
लक्ष्मीपति विष्णु |
शुक्र |
ॐ श्रीनारायणाय विद्महे लक्ष्मीपतये धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् ॥ |
धन, सौभाग्य, समृद्धि और पारिवारिक सुख |
| 5 |
योगेश्वर विष्णु |
बुध |
ॐ योगेश्वराय विद्महे माधवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् ॥ |
ध्यान, एकाग्रता, योग साधना में सफलता |
| 6 |
गोविंद विष्णु (पालन एवं करुणा रूप) |
चन्द्र |
ॐ गोविन्दाय विद्महे पुरुषोत्तमाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् ॥ |
धर्म पालन, करुणा और आत्मशक्ति |
| 7 |
सर्वव्यापक विष्णु (विश्वात्मा रूप) |
सूर्य |
ॐ सर्वव्यापकाय विद्महे विश्वात्मने धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् ॥ |
सर्वज्ञता, विश्व प्रेम, एकता और करुणा |
| 8 |
अनंत विष्णु (शाश्वत रूप) |
शनि |
ॐ अनन्ताय विद्महे नारायणाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् ॥ |
स्थिरता, दीर्घायु, शांति और संतुलन |
| 9 |
क्षीरसागरशायी विष्णु |
चन्द्र + शनि |
ॐ क्षीरसागरशायी विद्महे पद्मनाभाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् ॥ |
ध्यान, शांति, अंतर्मन की स्थिरता |
| 10 |
हरि विष्णु (मुक्तिदाता रूप) |
राहु |
ॐ हरये विद्महे जगन्नाथाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् ॥ |
पापों का नाश, मोक्ष, और भक्ति की वृद्धि |
| 11 |
विष्णुपति (पालन एवं सुरक्षा रूप) |
मंगल |
ॐ विष्णुपतये विद्महे मधुसूदनाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् ॥ |
रक्षा, साहस और जीवन में विजय |
| 12 |
श्री पद्मनाभ विष्णु (ध्यान रूप) |
केतु + बुध |
ॐ पद्मनाभाय विद्महे नारायणाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् ॥ |
ध्यान, अंतर्दृष्टि, आत्मिक सुख |
भगवान विष्णु के दस अवतारों के गायत्री मंत्र और उद्देश्य
| क्रम |
विष्णु अवतार |
ग्रह |
गायत्री मंत्र |
उद्देश्य |
| 1 |
मत्स्य अवतार (ज्ञान का प्रतीक) |
केतु |
ॐ मत्स्याय विद्महे महामीनाय धीमहि तन्नो मत्स्यः प्रचोदयात् ॥ |
ज्ञान, दिशा, जीवन रक्षा, आध्यात्मिक आरंभ |
| 2 |
कूर्म अवतार (धैर्य और संतुलन) |
शनि |
ॐ कूर्माय विद्महे महामत्याय धीमहि तन्नो कूर्मः प्रचोदयात् ॥ |
धैर्य, सहनशीलता, मानसिक स्थिरता |
| 3 |
वराह अवतार (पृथ्वी रक्षा) |
मंगल |
ॐ वराहाय विद्महे महापुरुषाय धीमहि तन्नो वराहः प्रचोदयात् ॥ |
स्थिरता, शक्ति, धरती और जीवन रक्षा |
| 4 |
नरसिंह अवतार (भय का नाश) |
राहु |
ॐ उग्राय विद्महे वज्रनखाय धीमहि तन्नो नरसिंहः प्रचोदयात् ॥ |
साहस, भय नाश, आत्मबल |
| 5 |
वामन अवतार (विनम्रता और धर्म) |
गुरु |
ॐ त्रिविक्रमार्य विद्महे वामनाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् ॥ |
नम्रता, धर्म पालन, आध्यात्मिक उन्नति |
| 6 |
परशुराम अवतार (न्याय और साहस) |
मंगल + केतु |
ॐ जमदग्नये विद्महे महावीराय धीमहि तन्नो परशुरामः प्रचोदयात् ॥ |
अन्याय का अंत, आत्मसंयम, साहस |
| 7 |
राम अवतार (मर्यादा पुरुषोत्तम) |
सूर्य |
ॐ रामचन्द्राय विद्महे सीतावल्लभाय धीमहि तन्नो रामः प्रचोदयात् ॥ |
धर्म, मर्यादा, सत्य, कर्तव्य पालन |
| 8 |
कृष्ण अवतार (भक्ति और प्रेम) |
चन्द्र + शुक्र |
ॐ वासुदेवाय विद्महे देवकीनन्दनाय धीमहि तन्नो कृष्णः प्रचोदयात् ॥ |
प्रेम, आनंद, भक्ति, मोक्ष |
| 9 |
बुद्ध अवतार (करुणा और विवेक) |
बुध |
ॐ बुद्धाय विद्महे महामत्याय धीमहि तन्नो बुद्धः प्रचोदयात् ॥ |
करुणा, अहिंसा, जागृति, ध्यान |
| 10 |
कल्कि अवतार (न्याय और धर्म पुनर्स्थापन) |
सर्वग्रह शांति |
ॐ कल्किने विद्महे विश्णुवीराय धीमहि तन्नो कल्किः प्रचोदयात् ॥ |
अन्याय नाश, धर्म पुनर्जागरण, शक्ति |
शिव
| क्रम |
शिव स्वरूप |
ग्रह |
गायत्री मंत्र |
उद्देश्य |
| 1 |
महादेव शिव (मुख्य) |
सर्वग्रह शांति (नवग्रह संतुलन) |
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो शिवः प्रचोदयात् ॥ |
मोक्ष, आध्यात्मिक जागरण, आत्मबल |
| 2 |
रुद्र शिव |
मंगल + राहु |
ॐ रुद्राय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् ॥ |
क्रोध, रोग, और नकारात्मकता का शमन |
| 3 |
महामृत्युंजय शिव |
मंगल + राहु |
ॐ त्र्यंबकाय विद्महे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनाय धीमहि तन्नो मृत्युः प्रचोदयात् ॥ |
अकाल मृत्यु से रक्षा, स्वास्थ्य, दीर्घायु |
| 4 |
पंचवक्त्र शिव |
सर्वग्रह शांति (नवग्रह संतुलन) |
ॐ पंचवक्त्राय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो शिवः प्रचोदयात् ॥ |
पंचतत्व संतुलन, सर्वांगीण उन्नति |
| 5 |
नटराज शिव |
शुक्र + बुध |
ॐ नटराजाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो नृत्येशः प्रचोदयात् ॥ |
कला, संगीत, जीवन में तालमेल |
| 6 |
भैरव शिव |
शनि + राहु + केतु |
ॐ कालभैरवाय विद्महे महाकालाय धीमहि तन्नो भैरवः प्रचोदयात् ॥ |
भय नाश, सुरक्षा, तंत्र शक्ति |
| 7 |
नीलकंठ शिव |
राहु |
ॐ नीलकण्ठाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो शिवः प्रचोदयात् ॥ |
विष-भाव नाश, शुद्धिकरण, सहनशीलता |
| 8 |
सदाशिव (परम चेतना) |
केतु |
ॐ सदाशिवाय विद्महे परमेश्वराय धीमहि तन्नो शिवः प्रचोदयात् ॥ |
आत्मज्ञान, समाधि, ब्रह्म बोध |
| 9 |
शंकर शिव (कल्याणकारी) |
चन्द्र |
ॐ शंकराय विद्महे महेश्वराय धीमहि तन्नो देवः प्रचोदयात् ॥ |
कल्याण, सुख-शांति, पारिवारिक सौहार्द |
| 10 |
महाकाल शिव |
शनि |
ॐ महाकालाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो कालः प्रचोदयात् ॥ |
समय नियंत्रण, निडरता, आत्मबल |
| 11 |
अर्धनारीश्वर शिव |
शुक्र + चन्द्र |
ॐ अर्धनारीश्वराय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो शिवः प्रचोदयात् ॥ |
पुरुष-स्त्री ऊर्जा संतुलन, संबंधों में सामंजस्य |
| 12 |
त्रिलोचन शिव (तीन नेत्र वाले) |
सूर्य |
ॐ त्रिलोचनाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो शिवः प्रचोदयात् ॥ |
अंतर्ज्ञान, विवेक, तीसरे नेत्र की शक्ति |
| 13 |
भोलानाथ शिव |
गुरु |
ॐ भोलेनाथाय विद्महे महेश्वराय धीमहि तन्नो शिवः प्रचोदयात् ॥ |
करुणा, सरलता, प्रेम और भक्ति |
| 14 |
विश्वनाथ शिव (काशीपति) |
केतु + गुरु |
ॐ विश्वनाथाय विद्महे महेश्वराय धीमहि तन्नो हरः प्रचोदयात् ॥ |
मोक्ष, ज्ञान, मृत्यु भय से मुक्ति |
| 15 |
सोमनाथ शिव (चंद्र रूप) |
चन्द्र |
ॐ सोमेश्वराय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो शिवः प्रचोदयात् ॥ |
मानसिक शांति, चंद्र-ऊर्जा संतुलन |
देवी जगदम्बा
| क्रम |
देवी |
देवी स्वरूप |
ग्रह |
गायत्री मंत्र |
उद्देश्य |
| 1 |
आदिशक्ति |
समस्त सृष्टि की मूल ऊर्जा, त्रिदेवी (पार्वती-लक्ष्मी-सरस्वती) का संयुक्त रूप, ब्रह्मांड जननी |
सर्वग्रह शांति (नवग्रह संतुलन) |
ॐ आद्याशक्त्यै विद्महे परमेश्वर्यै धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात् ॥ |
जीवन संतुलन, भाग्य जागरण, रक्षा, सुख-समृद्धि |
| 2 |
दुर्गा |
सिंहवाहिनी, दुष्ट संहारिणी |
शक्तिराहु + शनि |
ॐ दुर्गायै विद्महे महिषासुरमर्दिन्यै धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात् ॥ |
भय, बाधा, रोग और शत्रु नाश; साहस की वृद्धि |
| 3 |
पार्वती |
शिवप्रिया, सौम्य मातृ रूप |
चन्द्र |
ॐ पार्वत्यै विद्महे महादेवप्रियायै धीमहि तन्नो गौरी प्रचोदयात् ॥ |
दांपत्य सुख, सौहार्द, करुणा और सौंदर्य |
| 4 |
अम्बिका |
करुणामयी मातृ रूप |
चन्द्र + शुक्र |
ॐ अम्बिकायै विद्महे जगन्मातर्यै धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात् ॥ |
परिवार सुख |
| 5 |
महालक्ष्मी |
धन, ऐश्वर्य, समृद्धि की अधिष्ठात्री, कमलासन |
शुक्र |
ॐ महालक्ष्म्यै विद्महे विष्णुप्रियायै धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॥ |
धन लाभ, वैभव, सुख, व्यापार वृद्धि |
| 6 |
सरस्वती |
ज्ञान, वाणी, विद्या की देवी, वीणावादिनी |
बुध |
ॐ सरस्वत्यै विद्महे ब्रह्मपुत्र्यै धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात् ॥ |
बुद्धि, पढ़ाई, वाणी, परीक्षा सफलता |
| 7 |
भवानी |
पालन करने वाली जगत माता |
सूर्य + चन्द्र |
ॐ भवानीयै विद्महे महेश्वर्यै धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात् ॥ |
रक्षा, जीवन स्थिरता |
| 8 |
काली |
कालसंहारिणी, उग्र रक्षक |
शनि |
ॐ कालीकायै विद्महे महाकाल्यै धीमहि तन्नो काली प्रचोदयात् ॥ |
नकारात्मकता, भय और शत्रु का नाश |
| 9 |
चामुंडा देवी |
चंड-मुंड विनाशिनी उग्र शक्ति |
मंगल + केतु |
ॐ चामुण्डायै विद्महे बलरूपायै धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात् ॥ |
तंत्र रक्षा, शत्रु निवारण, काला जादू |
| 10 |
अन्नपूर्णा |
अन्न-धन की दात्री |
गुरु |
ॐ अन्नपूर्णायै विद्महे विश्वेश्वरप्रियायै धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात् ॥ |
भोजन, समृद्धि, संतोष |
| 11 |
कामाख्या |
कामरूपा |
शुक्र |
ॐ कामाख्यायै विद्महे कामरूपिण्यै धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात् ॥ |
संतान, प्रेम |
दश महाविद्या
| क्रम |
महाविद्या |
देवी स्वरूप |
ग्रह |
गायत्री मंत्र |
उद्देश्य |
| 1 |
महाकाली |
काल व मृत्यु से परे, संहार शक्ति |
शनि |
ॐ कालिकायै विद्महे स्मशानवासिन्यै धीमहि तन्नो काली प्रचोदयात् ॥ |
भय, बाधा, रोग और शत्रु नाश; साहस की वृद्धि |
| 2 |
तारा |
तारिणी रक्षक, मार्गदर्शक |
गुरु |
ॐ तारायै विद्महे नीलसरस्वत्यै धीमहि तन्नो तारा प्रचोदयात् ॥ |
संकट से रक्षा |
| 3 |
त्रिपुरसुन्दरी (शोडशी) |
श्रीविद्या, परम सौन्दर्य, चेतना |
बुध + शुक्र |
ॐ त्रिपुरसुन्दर्यै विद्महे कामेश्वर्यै धीमहि तन्नो ललिता प्रचोदयात् ॥ |
आकर्षण, भाग्य |
| 4 |
भुवनेश्वरी |
ब्रह्माण्ड की अधिष्ठात्री माता |
चन्द्र |
ॐ भुवनेश्वर्यै विद्महे महेश्वर्यै धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात् ॥ |
मानसिक शांति |
| 5 |
भैरवी |
तप, जागरण, अग्निशक्ति |
मंगल |
ॐ त्रिपुरभैरव्यै विद्महे महाभैरव्यै धीमहि तन्नो भैरवी प्रचोदयात् ॥ |
साहस, ऊर्जा |
| 6 |
छिन्नमस्ता |
अहंकार छेदन, कुंडलिनी जागरण |
राहु |
ॐ छिन्नमस्तायै विद्महे वज्रवैरोचन्यै धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात् ॥ |
अचानक बाधा नाश |
| 7 |
धूमावती |
शून्य, वैराग्य, त्याग |
केतु |
ॐ धूमावत्यै विद्महे अलक्ष्म्यै धीमहि तन्नो धूमा प्रचोदयात् ॥ |
कर्ज मुक्ति |
| 8 |
बगलामुखी |
स्तम्भन शक्ति, शत्रु नियंत्रण |
मंगल + राहु |
ॐ बगलामुख्यै विद्महे स्तम्भिन्यै धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात् ॥ |
कोर्ट विजय |
| 9 |
मातंगी |
वाणी, कला, तंत्र सरस्वती |
बुध |
ॐ मातंग्यै विद्महे श्यामलायै धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात् ॥ |
वाणी सिद्धि |
| 10 |
कमला |
लक्ष्मी स्वरूप, धन समृद्धि |
शुक्र |
ॐ कमलायै विद्महे महालक्ष्म्यै धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॥ |
धन, वैभव |
नवदुर्गा
| क्रम |
नवदुर्गा देवी स्वरूप |
ग्रह |
गायत्री मंत्र |
उद्देश्य |
| 1 |
शैलपुत्री (पर्वतराज हिमालय की कन्या) |
चन्द्र |
ॐ शैलपुत्र्यै विद्महे महादेवप्रियायै धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात् ॥ |
आध्यात्मिक शक्ति, स्थिरता, आत्मविश्वास |
| 2 |
ब्रह्मचारिणी (तपस्विनी स्वरूप) |
बुध |
ॐ ब्रह्मचारिण्यै विद्महे तपश्चरिण्यै धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात् ॥ |
साधना, संयम, आत्मनियंत्रण, एकाग्रता |
| 3 |
चंद्रघंटा (शक्ति और वीरता की देवी) |
सूर्य |
ॐ चंद्रघंटायै विद्महे सिंहवाहिन्यै धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात् ॥ |
साहस, विजय, निडरता, मानसिक शांति |
| 4 |
कूष्मांडा (सृष्टि की आदिशक्ति) |
सूर्य तेज + स्वास्थ्य |
ॐ कूष्माण्डायै विद्महे आदित्यहृदयायै धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात् ॥ |
ऊर्जा, प्रसन्नता, सृजन शक्ति |
| 5 |
स्कंदमाता (कार्तिकेय की माता) |
गुरु |
ॐ स्कन्दमातायै विद्महे महादेवप्रियायै धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात् ॥ |
मातृत्व, परिवारिक सुख, करुणा |
| 6 |
कात्यायनी (शक्ति और विवाह की देवी) |
शुक्र |
ॐ कात्यायन्यै विद्महे कन्याकुमार्यै धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात् ॥ |
विवाह, संतान, सौंदर्य, नारी शक्ति |
| 7 |
कालरात्रि (संहारक रूप) |
शनि + राहु |
ॐ कालरात्र्यै विद्महे महाभयहारिण्यै धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात् ॥ |
भय, क्लेश, शत्रु और नकारात्मकता का नाश |
| 8 |
महागौरी (शुद्धता और सौंदर्य की देवी) |
राहु |
ॐ महागौर्यै विद्महे शुद्धदेहायै धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात् ॥ |
मानसिक शुद्धता, सौंदर्य, आध्यात्मिक उन्नति |
| 9 |
सिद्धिदात्री (सिद्धि और पूर्णता की देवी) |
मंगल + केतु |
ॐ सिद्धिदात्यै विद्महे महादेवप्रियायै धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात् ॥ |
सिद्धि, सफलता, मोक्ष, आत्मसाक्षात्कार |
नवग्रह देवता
| क्रम |
नवग्रह |
पौराणिक ग्रह देवता का स्वरूप |
गायत्री मंत्र |
उद्देश्य / प्रभाव |
| 1 |
सूर्य देव |
सप्तअश्वों पर आरूढ़ तेजस्वी देव, प्रकाश व जीवन के दाता |
ॐ अश्वध्वजाय विद्महे पाशहस्ताय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात् ॥ |
आत्मबल, स्वास्थ्य, सफलता, तेजस्विता, रोगनाश |
| 2 |
चंद्र देव |
शीतलता व मन के अधिपति, अमृतरूप सोमदेव |
ॐ पद्मध्वजाय विद्महे हेमरूपाय धीमहि तन्नो सोमः प्रचोदयात् ॥ |
मानसिक शांति, प्रेम, स्थिरता, परिवारिक सौहार्द |
| 3 |
मंगल देव |
भूमि-पुत्र, सेनापति, शक्ति और साहस के प्रतीक |
ॐ वीरध्वजाय विद्महे विघ्नहस्ताय धीमहि तन्नो भौमः प्रचोदयात् ॥ |
साहस, पराक्रम, भूमि व संपत्ति योग |
| 4 |
बुध देव |
हरेवर्ण, बुद्धि और वाणी के स्वामी |
ॐ गजध्वजाय विद्महे शुकहस्ताय धीमहि तन्नो बुधः प्रचोदयात् ॥ |
वाणी की मधुरता, व्यापार, तर्कशक्ति |
| 5 |
गुरु (बृहस्पति) |
देवगुरु, ज्ञान, धर्म और संतति के अधिपति |
ॐ वृषभध्वजाय विद्महे घृणिहस्ताय धीमहि तन्नो गुरुः प्रचोदयात् ॥ |
ज्ञान, संतान, धर्म, विवेक और आध्यात्मिकता |
| 6 |
शुक्र देव |
असुराचार्य, कला, प्रेम और भोग के अधिपति |
ॐ अश्वध्वजाय विद्महे धनुर्हस्ताय धीमहि तन्नो शुक्रः प्रचोदयात् ॥ |
सौंदर्य, प्रेम, कला, ऐश्वर्य, विवाह सुख |
| 7 |
शनि देव |
सूर्यपुत्र, न्याय और कर्मफल दाता |
ॐ काकध्वजाय विद्महे खड्गहस्ताय धीमहि तन्नो मन्दः प्रचोदयात् ॥ |
धैर्य, न्याय, कर्म सुधार, कष्ट निवारण |
| 8 |
राहु |
छाया ग्रह, भ्रम और माया शक्ति के अधिपति |
ॐ नागध्वजाय विद्महे पद्महस्ताय धीमहि तन्नो राहुः प्रचोदयात् ॥ |
मानसिक संतुलन, विपत्ति निवारण, नियंत्रण शक्ति |
| 9 |
केतु |
अध्यात्म, मोक्ष और रहस्यविद्या के दाता |
ॐ अश्वध्वजाय विद्महे शूलहस्ताय धीमहि तन्नो केतुः प्रचोदयात् ॥ |
अध्यात्म, कुंडलिनी जागरण, मोक्ष, अंतर्ज्ञान |
नक्षत्र देवता
| क्रम |
नक्षत्र |
ग्रह |
पौराणिक नक्षत्र देवता का स्वरूप |
गायत्री मंत्र |
उद्देश्य / प्रभाव |
| 1 |
अश्विनी |
केतु |
अश्विनी कुमार (देव वैद्य, उपचार शक्ति) |
ॐ अश्विनीकुमाराभ्यां विद्महे वैद्यराजाय धीमहि तन्नो अश्विनी प्रचोदयात् ॥ |
स्वास्थ्य, ऊर्जा, रोगनाश |
| 2 |
भरणी |
शुक्र |
यम धर्मराज (कर्म न्यायाधीश) |
ॐ कालराजाय विद्महे यमधर्माय धीमहि तन्नो यमः प्रचोदयात् ॥ |
कर्म शुद्धि, गलत आदत समाप्त |
| 3 |
कृत्तिका |
सूर्य |
अग्नि देव (शुद्धिकर्ता) |
ॐ अग्निदेवाय विद्महे महाज्वालाय धीमहि तन्नो अग्निः प्रचोदयात् ॥ |
साहस, शुद्धि, निर्णय शक्ति |
| 4 |
रोहिणी |
चन्द्र |
ब्रह्मा (सृजन शक्ति) |
ॐ चतुर्मुखाय विद्महे हंसारूढाय धीमहि तन्नो ब्रह्मा प्रचोदयात् ॥ |
आकर्षण, धन, उन्नति |
| 5 |
मृगशिरा |
मंगल |
सोम (चन्द्र) |
ॐ चन्द्राय विद्महे अमृतत्वाय धीमहि तन्नो सोमः प्रचोदयात् ॥ |
मानसिक शांति |
| 6 |
आर्द्रा |
राहु |
रुद्र (विनाश व परिवर्तन) |
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् ॥ |
संकट नाश |
| 7 |
पुनर्वसु |
गुरु |
अदिति (देवमाता) |
ॐ अदितिदेवयै विद्महे विश्वमातरै धीमहि तन्नो अदिति प्रचोदयात् ॥ |
पुनः सफलता |
| 8 |
पुष्य |
शनि |
बृहस्पति |
ॐ गुरुदेवाय विद्महे परब्रह्मणे धीमहि तन्नो बृहस्पति प्रचोदयात् ॥ |
भाग्य वृद्धि |
| 9 |
आश्लेषा |
बुध |
नाग देवता |
ॐ नागदेवाय विद्महे सर्पराजाय धीमहि तन्नो नागः प्रचोदयात् ॥ |
शत्रु नियंत्रण |
| 10 |
मघा |
केतु |
पितृ देव |
ॐ पितृदेवाय विद्महे जगद्धात्रे धीमहि तन्नो पितरः प्रचोदयात् ॥ |
पितृ दोष शांति |
| 11 |
पूर्वाफाल्गुनी |
शुक्र |
भग देव (सौभाग्य) |
ॐ भगदेवाय विद्महे सौभाग्यदाय धीमहि तन्नो भगः प्रचोदयात् ॥ |
सुख, विवाह |
| 12 |
उत्तराफाल्गुनी |
सूर्य |
अर्यमा |
ॐ अर्यमणे विद्महे सूर्यपुत्राय धीमहि तन्नो अर्यमा प्रचोदयात् ॥ |
संबंध स्थिरता |
| 13 |
हस्त |
चन्द्र |
सविता सूर्य |
ॐ सवित्रे विद्महे भास्कराय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात् ॥ |
कौशल सफलता |
| 14 |
चित्रा |
मंगल |
विश्वकर्मा |
ॐ विश्वकर्मणे विद्महे सृजनकर्त्रे धीमहि तन्नो त्वष्टा प्रचोदयात् ॥ |
करियर उन्नति |
| 15 |
स्वाति |
राहु |
वायु देव |
ॐ वायुदेवाय विद्महे प्राणनाथाय धीमहि तन्नो वायुः प्रचोदयात् ॥ |
व्यापार वृद्धि |
| 16 |
विशाखा |
गुरु |
इन्द्र-अग्नि |
ॐ इन्द्राग्निभ्यां विद्महे वज्रहस्ताय धीमहि तन्नो इन्द्राग्नि प्रचोदयात् ॥ |
लक्ष्य प्राप्ति |
| 17 |
अनुराधा |
शनि |
मित्र देव |
ॐ मित्रदेवाय विद्महे सत्यरूपाय धीमहि तन्नो मित्रः प्रचोदयात् ॥ |
सहयोग, मित्रता |
| 18 |
ज्येष्ठा |
बुध |
इन्द्र |
ॐ देवेन्द्राय विद्महे वज्रहस्ताय धीमहि तन्नो इन्द्रः प्रचोदयात् ॥ |
प्रतिष्ठा |
| 19 |
मूल |
केतु |
निरृति देवी |
ॐ निरृत्यै विद्महे दुःखनाशिन्यै धीमहि तन्नो निरृति प्रचोदयात् ॥ |
बाधा नाश |
| 20 |
पूर्वाषाढ़ा |
शुक्र |
आपः (जल शक्ति) |
ॐ आपोदेव्यै विद्महे वरुणप्रियाय धीमहि तन्नो आपः प्रचोदयात् ॥ |
विजय |
| 21 |
उत्तराषाढ़ा |
सूर्य |
विश्वदेव |
ॐ विश्वदेवाय विद्महे धर्मपालाय धीमहि तन्नो विश्वदेवः प्रचोदयात् ॥ |
स्थायी सफलता |
| 22 |
श्रवण |
चन्द्र |
विष्णु |
ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् ॥ |
करियर, ज्ञान |
| 23 |
धनिष्ठा |
मंगल |
वसु देव |
ॐ वसुदेवाय विद्महे धनाधिपाय धीमहि तन्नो वसुः प्रचोदयात् ॥ |
धन लाभ |
| 24 |
शतभिषा |
राहु |
वरुण देव |
ॐ वरुणाय विद्महे जलाधिपाय धीमहि तन्नो वरुणः प्रचोदयात् ॥ |
रोग मुक्ति |
| 25 |
पूर्वाभाद्रपद |
गुरु |
अजैकपाद रुद्र |
ॐ अजैकपादाय विद्महे रुद्ररूपाय धीमहि तन्नो अजैकपाद प्रचोदयात् ॥ |
आध्यात्मिक शक्ति |
| 26 |
उत्तराभाद्रपद |
शनि |
अहिर्बुध्न्य नाग |
ॐ अहिर्बुध्न्याय विद्महे नागराजाय धीमहि तन्नो अहिर्बुध्न्य प्रचोदयात् ॥ |
स्थिरता |
| 27 |
रेवती |
बुध |
नाग देवता |
ॐ पूष्णे विद्महे पथिपालाय धीमहि तन्नो पूषा प्रचोदयात् ॥ |
यात्रा सुरक्षा |
| 28 |
अभिजीत |
सूर्य |
ब्रह्मा / हरि (विजय शक्ति) |
ॐ अभिजिताय विद्महे ब्रह्मरूपाय धीमहि तन्नो अभिजित् प्रचोदयात् ॥ |
विजय, कार्य सिद्धि |
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